हर वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों के मन में भ्रम बना रहता है। कभी यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है, तो कभी 15 जनवरी को। कुछ वर्षों में 13 जनवरी को भी मकर संक्रांति मनाए जाने के उदाहरण मिलते हैं। ऐसे में वर्ष 2026 को लेकर भी लोगों के मन में यही सवाल है कि मकर संक्रांति आखिर किस दिन पड़ेगी।
आइए, इस भ्रम को सरल शब्दों में समझते हैं और जानते हैं कि वर्ष 2026 में मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी तथा हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है।
सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व
मकर संक्रांति कोई सामान्य तिथि आधारित पर्व नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना से जुड़ा हुआ है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी क्षण को मकर संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ‘संक्रांति’ का अर्थ सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना होता है।
आमतौर पर यह पर्व 14 जनवरी के आसपास आता है, लेकिन सूर्य की गति में होने वाले सूक्ष्म खगोलीय परिवर्तनों के कारण कभी-कभी इसकी तिथि में बदलाव हो जाता है। इसी कारण यह पर्व कभी 14, कभी 15 और दुर्लभ रूप से 13 जनवरी को भी मनाया जाता है।
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म और संस्कृति में मकर संक्रांति को अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।
उत्तरायण का शुभ आरंभ
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा जाता है। इस अवधि में किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
स्नान और दान की परंपरा
इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और कंबल का दान करने की परंपरा है। तिल का सेवन और तिल-दान मकर संक्रांति की विशेष पहचान है।
पतंग उत्सव
देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति पतंग उड़ाने के पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह उत्सव नई ऊँचाइयों को छूने, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

उत्तरायण काल का आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति से अगले छह माह तक सूर्य उत्तरायण रहता है। यह काल आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। इसी कारण महाभारत के भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण काल की प्रतीक्षा की थी, ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके।
इसके साथ ही, सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ने लगती हैं, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है।
2026 में मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी?
दृक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य दोपहर बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए पुण्यकाल भी शाम के समय रहेगा।
मकर संक्रांति का क्षण:
14 जनवरी 2026, दोपहर 3:13 बजे
पुण्य काल:
3:13 PM से 5:45 PM (कुल 2 घंटे 32 मिनट)
महा पुण्य काल:
3:13 PM से 4:58 PM (कुल 1 घंटा 45 मिनट)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान, दान और पूजा जैसे शुभ कार्य पुण्यकाल में ही करना सर्वोत्तम माना जाता है। इसलिए 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:13 बजे के बाद किए गए धार्मिक कार्य विशेष रूप से फलदायी होंगे।
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