इंदौर का करोड़पति भिखारी, तीन मकान, कार और ऑटो का मालिक

Published: Tue, 20 Jan 2026 03:10 PM (IST)
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इंदौर का करोड़पति भिखारी: भीख मांगकर खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, तीन मकान, कार और ऑटो का मालिक

इंदौर—जिसे देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिना जाता है—अब एक और हैरान करने वाली वजह से चर्चा में है। यहां एक ऐसा भिखारी सामने आया है, जिसकी कमाई और संपत्ति जानकर अच्छे-अच्छे नौकरीपेशा लोग भी दंग रह जाएं। सड़क किनारे भीख मांगने वाला यह व्यक्ति करोड़ों की संपत्ति, तीन पक्के मकान, एक कार और एक ऑटो का मालिक है। सवाल यह नहीं कि उसके पास क्या-क्या है, सवाल यह है कि यह सब कैसे संभव हुआ?

कौन है यह ‘करोड़पति भिखारी’?

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह व्यक्ति इंदौर के व्यस्त इलाकों—मंदिरों, बाजारों और ट्रैफिक सिग्नलों— पर वर्षों से भीख मांग रहा था। सादा कपड़े, हाथ में कटोरा और चेहरा झुका हुआ—यही उसकी पहचान थी। लेकिन परतें तब खुलीं जब प्रशासनिक जांच में उसकी वास्तविक कमाई और संपत्ति सामने आई।

कमाई का गणित: रोज़ की भीख, सालों की बचत

जांच में यह बात सामने आई कि वह रोज़ाना औसतन 2,000 से 3,000 रुपये तक कमा लेता था। त्योहारों, सावन, नवरात्रि और बड़े मेलों में यह रकम और बढ़ जाती थी।

  • मासिक अनुमानित कमाई: 60,000–90,000 रुपये
  • वार्षिक अनुमानित कमाई: 7–10 लाख रुपये
  • कई सालों की निरंतर कमाई और बचत: करोड़ों में संपत्ति

उसने अपनी कमाई को खर्च करने के बजाय जमीन, मकान और वाहनों में लगाया। यही वजह है कि आज वह तीन मकानों, एक कार और एक ऑटो का मालिक है।

तीन मकान, कार और ऑटो—सब कुछ वैध

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसकी संपत्तियों के कागजात पूरी तरह वैध पाए गए।

  • तीन पक्के मकान: अलग-अलग इलाकों में
  • कार: निजी उपयोग के लिए
  • ऑटो: किराये पर चलाकर अतिरिक्त आमदनी

यानी, भीख उसकी मुख्य आय थी, लेकिन उसने उससे आगे बढ़कर स्मार्ट निवेश किया।

प्रशासन की जांच और सवाल

मामला सामने आने के बाद नगर निगम और समाज कल्याण विभाग ने जांच शुरू की। प्रशासन का कहना है कि शहर में पेशेवर भिखारियों का नेटवर्क सक्रिय है, जो आम लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर मोटी कमाई कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार:

  • कई भिखारी वास्तविक जरूरतमंद नहीं होते
  • कुछ लोग इसे पेशे के तौर पर अपनाते हैं
  • संगठित गिरोह भी सक्रिय हो सकते हैं

समाज के लिए बड़ा सवाल

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े कई सवालों की है:

  1. क्या हर भिखारी जरूरतमंद होता है?
  2. क्या हमारी दया सही जगह पहुंच रही है?
  3. क्या भीख देना समस्या का समाधान है या उसे बढ़ावा देता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे पैसे देने के बजाय सरकारी या सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से मदद करना ज्यादा प्रभावी होता है।

सरकार और समाज की भूमिका

सरकार समय-समय पर भिक्षावृत्ति रोकने के लिए योजनाएं चलाती है— पुनर्वास योजनाएं, रोजगार प्रशिक्षण और आश्रय गृह। लेकिन इन योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब समाज भी जागरूक हो। हर हाथ फैलाने वाले को पैसा देने से पहले सोचने की जरूरत है।

निष्कर्ष

इंदौर का यह ‘करोड़पति भिखारी’ एक आईना है—हमारी सोच, हमारी संवेदनशीलता और हमारी व्यवस्था का। यह घटना बताती है कि मेहनत और समझदारी से पैसा कमाया जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कि गलत रास्ते से कमाई समाज के लिए सही संदेश नहीं देती

जरूरत है कि हम वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाएं और पेशेवर भिक्षावृत्ति को हतोत्साहित करें। तभी समाज में संतुलन और न्याय संभव होगा।

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