छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: खनन से पशुपालन तक—आर्थिक मजबूती की नई रणनीति
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जो राज्य के आर्थिक विकास, प्रशासनिक सुधार और ग्रामीण आजीविका को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। खनिज नीति में सुधार से लेकर पशुपालन और वित्तीय दायित्वों के संतुलन तक—इन निर्णयों का व्यापक असर आने वाले वर्षों में देखने को मिल सकता है।
Ease of Doing Business: खनन क्षेत्र में बड़े सुधार
राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के उद्देश्य से खनन क्षेत्र में कई अहम बदलाव किए हैं।
- अब रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र से संबंधित प्रावधान पूरे प्रदेश में एक समान लागू किए जाएंगे।
- उत्खनन पट्टों के समामेलन (merging of leases) को आसान बनाया गया है।
- अनुबंध के बाद भूमि पर प्रवेश (post-contract land access) और पर्यावरणीय शर्तों के अनुरूप संचालन को अधिक स्पष्ट और सुदृढ़ किया गया है।
इन सुधारों का उद्देश्य खनन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना है। इससे न केवल खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा बल्कि राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
दुधारू पशु योजना: अब सभी वर्गों को मिलेगा लाभ
मंत्रिपरिषद ने दुधारू पशु प्रदाय से जुड़ी पायलट योजना में बड़ा बदलाव किया है।
- पहले यह योजना सीमित वर्गों तक थी, लेकिन अब इसे सभी सामाजिक वर्गों के लिए खोल दिया गया है।
- इस निर्णय से अनुसूचित जनजाति सहित अन्य वर्गों के हितग्राहियों को भी समान रूप से लाभ मिलेगा।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ाना और लोगों की आय में वृद्धि करना है। पशुपालन को बढ़ावा मिलने से दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पशुओं के टीकाकरण के लिए बड़ा फैसला
राज्य में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
- टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए National Dairy Development Board की सब्सिडियरी कंपनी Indian Immunologicals Limited से सीधे टीकों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
- निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा की कमी और जेम पोर्टल पर दर उपलब्ध न होने के कारण पहले आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।
अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनवरी 2027 तक आवश्यक टीकों की आपूर्ति इसी एजेंसी से की जाएगी।
इस फैसले के फायदे:
- पशुओं में रोगों की रोकथाम
- मृत्यु दर में कमी
- पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा
- दूध, अंडा और मांस उत्पादन में वृद्धि
मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के बीच पेंशन विवाद का समाधान
मंत्रिपरिषद ने एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से लंबित था।
- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व वर्षों में 10,536 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पेंशन भुगतान किया गया था।
- यह त्रुटि बैंकों के गलत लेखांकन के कारण हुई थी।
- अब इस राशि की वापसी पर सहमति बन गई है।
भुगतान की योजना:
- 2,000 करोड़ रुपये पहले ही वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिए जा चुके हैं।
- शेष 8,536 करोड़ रुपये आगामी 6 वार्षिक किस्तों में चुकाए जाएंगे।
यह निर्णय दोनों राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
खरीफ सीजन और LPG आपूर्ति की समीक्षा
बैठक में आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।
- किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
- साथ ही राज्य में LPG गैस की आपूर्ति स्थिति का भी आकलन किया गया, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
क्या है इन फैसलों का व्यापक असर?
सरकार के ये निर्णय केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर आम लोगों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
✔ आर्थिक प्रभाव
- खनन क्षेत्र में सुधार से निवेश बढ़ेगा
- राजस्व में वृद्धि होगी
✔ ग्रामीण विकास
- पशुपालन को बढ़ावा
- स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे
✔ सामाजिक समावेशन
- सभी वर्गों को योजनाओं का लाभ
- आय असमानता में कमी
✔ प्रशासनिक पारदर्शिता
- प्रक्रियाओं का सरलीकरण
- वित्तीय विवादों का समाधान
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