बोकारो में CISF जवान बनेंगे साइबर कमांडो: AI तकनीक से अपराध नियंत्रण
HighLights
- CISF जवानों को मिलेगा साइबर कमांडो का विशेष प्रशिक्षण।
- राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी और फोरेंसिक साइंस सेंटर से हुआ समझौता।
- AI तकनीक के जरिए साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण।
बोकारो: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान अब साइबर कमांडो का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। दिल्ली मुख्यालय ने राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी और नेशनल फोरेंसिक साइंस सेंटर, गांधीनगर (गुजरात) के साथ समझौता किया है।
इस पहल का उद्देश्य जवानों को साइबर अपराधों से निपटने की तकनीकी जानकारी देना और AI आधारित उपकरणों के इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। इससे CISF कर्मी तेजी से बढ़ते साइबर खतरों का सामना कर सकेंगे और सुरक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी बना सकेंगे।
साइबर कमांडो प्रशिक्षण: उद्देश्य और प्रक्रिया
CISF के जवानों और अधिकारियों के लिए यह प्रशिक्षण एक विशेष कोर्स के रूप में आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण में शामिल विषय होंगे:
- साइबर क्राइम और सुरक्षा खतरों की जानकारी
- AI आधारित अपराध निगरानी और डेटा विश्लेषण
- नेटवर्क सुरक्षा और फॉरेंसिक साइंस तकनीकें
- आपातकालीन सुरक्षा प्रतिक्रिया प्रणाली का अभ्यास
पहले चरण में प्रशिक्षण उन जवानों और अधिकारियों को दिया जाएगा जिन्होंने तकनीकी संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की हो या इंजीनियरिंग जैसी डिग्री प्राप्त की हो।
इस प्रशिक्षण का लाभ बीएसएल बोकारो, बीसीसीएल धनबाद, सीसीएल करगली, बोकारो थर्मल, चंद्रपुरा, ललपनिया, रांची, पतरातू और पटना सहित CISF की सभी प्रमुख इकाइयों में कार्यरत जवान और अधिकारी ले सकेंगे।
AI और एकीकृत कमान केंद्र
CISF दिल्ली मुख्यालय महारत्न कंपनी सेल के सभी इकाइयों में Integrated Command & Control Center का निर्माण करेगा।
इस केंद्र के जरिए संयंत्रों के मशीनी उपकरणों की निगरानी, यातायात प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और नागरिक गतिविधियों पर 24 घंटे नियंत्रण रखा जाएगा।
इस प्रणाली से कम मैनपावर में भी सुरक्षा मामलों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। जवान और अधिकारी AI तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त कर सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करेंगे।
साइबर सुरक्षा में नई दिशा
CISF में साइबर कमांडो प्रशिक्षण की शुरुआत सुरक्षा बल के लिए एक नई दिशा खोलती है। पहले सुरक्षा कर्मी जमीनी सतह और मानवीय सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते थे, लेकिन डिजिटल युग में साइबर खतरों और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना जरूरी हो गया है।
AI आधारित प्रशिक्षण से जवानों को:
- साइबर अपराधों का पता लगाने और उन्हें रोकने की क्षमता
- डिजिटल फॉरेंसिक और डेटा विश्लेषण की समझ
- आपातकालीन सुरक्षा और संकट प्रबंधन की रणनीति
सिखाई जाएगी। यह कदम CISF की सुरक्षा दक्षता और स्मार्ट निगरानी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
सभी इकाइयों में प्रशिक्षण का लाभ
CISF के जवानों को प्रशिक्षण का फायदा पूरे देश में फैली इकाइयों में मिलेगा। इससे न सिर्फ सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि जवानों का तकनीकी कौशल भी बढ़ेगा।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को वास्तविक परिस्थितियों में AI टूल्स और साइबर सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। इससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में तेजी और कुशलता से प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
निष्कर्ष
CISF के जवानों को साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित करना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का जवाब है। AI तकनीक और फॉरेंसिक साइंस के इस्तेमाल से अपराध नियंत्रण में सुधार होगा और कम मैनपावर में भी सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।
यह पहल CISF के लिए एक नया अध्याय खोलती है, जहां तकनीकी दक्षता और डिजिटल सुरक्षा के साथ जमीनी सुरक्षा का सामंजस्य स्थापित होगा।
यह भी पढ़ें:
- India Post GDS Recruitment 2026: 23,757 पदों पर भर्ती, 10वीं पास के लिए बड़ा मौका
- JPSC भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामला: पूर्व चेयरमैन को CID का समन, आज होगी अहम पूछताछ
- SAIL Bokaro Housing Scheme 2026: अधिकारियों को मिलेगा पसंदीदा C-Type आवास, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
- ट्रेन के AC कोच को बना दिया ‘हनीमून सूट’, वायरल वीडियो के बाद रेलवे का बड़ा एक्शन
- बोकारो में अब CCTV काटेगा चालान! ट्रैफिक नियम तोड़ने पर घर पहुंचेगा E-Challan, DSP अजय प्रसाद ने दी जानकारी
👉 ऐसी ही ताज़ा और खास खबरों के लिए हमें Facebook पर Follow करें
Follow Us on Facebook









