देश की दो प्रमुख सरकारी कंपनियां, BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) और SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड), अपने प्रतिष्ठित ‘महारत्न’ दर्जे को लेकर संकट का सामना कर रही हैं। केंद्र सरकार ने दोनों कंपनियों को वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के लिए एक वर्ष का समय दिया है। यदि तय अवधि में प्रदर्शन बेहतर नहीं हुआ तो इनका दर्जा घटाकर ‘नवरत्न’ किया जा सकता है।
सरकार के इस कदम को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में जवाबदेही और बेहतर वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों कंपनियां महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए जरूरी लाभ संबंधी मानकों को पूरा नहीं कर सकी हैं।
क्या है महारत्न दर्जा?
महारत्न भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की उन कंपनियों को दिया जाता है जो वित्तीय रूप से मजबूत हों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हों। इस दर्जे के साथ कंपनियों को निवेश और कारोबारी फैसलों में अधिक स्वायत्तता मिलती है।
महारत्न कंपनियां सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना बड़े निवेश निर्णय ले सकती हैं। यही वजह है कि यह दर्जा किसी भी सरकारी कंपनी के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है।
क्यों बढ़ा खतरा?
जानकारी के अनुसार, महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए कंपनियों को पिछले तीन वर्षों में औसतन 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना होता है। समीक्षा में पाया गया कि BHEL और SAIL इस मानक पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति ने दोनों कंपनियों के प्रदर्शन पर चिंता जताई है और संबंधित मंत्रालयों को सुधार योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
दर्जा घटने पर क्या होगा असर?
यदि BHEL और SAIL का महारत्न दर्जा वापस लिया जाता है तो उनकी वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता पर सीधा असर पड़ेगा। वर्तमान में महारत्न कंपनियां 5,000 करोड़ रुपये तक के निवेश निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकती हैं, जबकि नवरत्न कंपनियों के लिए यह सीमा काफी कम होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बड़े प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया लंबी हो सकती है और कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
BHEL और SAIL की भूमिका
BHEL देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनियों में शामिल है, जो बिजली उत्पादन, परिवहन, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के लिए उपकरण बनाती है।
वहीं SAIL भारत की प्रमुख इस्पात निर्माता कंपनी है और देश के बुनियादी ढांचे तथा औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाती है।
सुधार की कोशिशें जारी
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में BHEL को हजारों करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट ऑर्डर भी मिले हैं, जिससे उसके कारोबार में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। कंपनी के ऑर्डर बुक और भविष्य की परियोजनाओं को लेकर बाजार में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं।
सरकार ने संबंधित मंत्रालयों से दोनों कंपनियों के लिए विस्तृत पुनरुद्धार (Revival) और प्रदर्शन सुधार योजना तैयार करने को कहा है। इसमें लाभ बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
निष्कर्ष
फिलहाल BHEL और SAIL का महारत्न दर्जा बरकरार है, लेकिन अगले एक वर्ष उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। यदि दोनों कंपनियां अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार करने में सफल रहती हैं तो वे अपना प्रतिष्ठित दर्जा बचा सकती हैं। वहीं अपेक्षित सुधार नहीं होने पर पहली बार किसी महारत्न कंपनी को नवरत्न श्रेणी में भेजे जाने की स्थिति बन सकती है।
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