प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से जुड़े करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को घटाने का फैसला लिया है। अब लाभार्थियों को साल में केवल चार गैस सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह सीमा नौ सिलेंडरों की थी।
सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत गैस खपत और बढ़ते सब्सिडी खर्च को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है।
क्या है नया नियम?
नए नियम के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के पात्र लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी, लेकिन यह लाभ साल के केवल पहले चार रिफिल तक ही सीमित रहेगा।
इस बदलाव के बाद एक परिवार को सालाना अधिकतम 1,200 रुपये की प्रत्यक्ष सब्सिडी मिलेगी। पहले नौ सिलेंडरों तक यह लाभ उपलब्ध था।
कब शुरू हुई थी उज्ज्वला योजना?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों, विशेष रूप से महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई उपलब्ध कराना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना था।
योजना के शुरुआती चरण में लाभार्थियों को 12 सब्सिडी वाले सिलेंडरों का लाभ मिलता था। बाद में सरकार ने इस सीमा को घटाकर 9 सिलेंडर किया और अब इसे 4 सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार अधिकांश उज्ज्वला लाभार्थी सालभर में चार से पांच गैस सिलेंडरों का ही उपयोग करते हैं। इसी औसत खपत को आधार बनाकर सब्सिडी की सीमा तय की गई है।
सरकार का मानना है कि वास्तविक जरूरत के अनुसार सब्सिडी देने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और वित्तीय बोझ को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी सब्सिडी पर सरकार ने हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
बढ़ती LPG कीमतें बनीं चिंता
हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये तक पहुंच गई है।
हालांकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद प्रभावी कीमत लगभग 642 रुपये पड़ती है। लेकिन सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम होने से उन परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है जिनकी सालाना खपत अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या असर है?
भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में वृद्धि का सीधा असर घरेलू गैस कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण LPG की वैश्विक कीमतों में तेजी आई है। इसी वजह से तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ी है और सरकार पर सब्सिडी का दबाव भी बढ़ा है।
लाभार्थियों पर क्या होगा असर?
यह फैसला उन परिवारों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकता है जो साल में चार से अधिक गैस सिलेंडर उपयोग करते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सिलेंडर बाजार मूल्य पर खरीदने पड़ सकते हैं।
हालांकि सरकार का दावा है कि अधिकांश उज्ज्वला लाभार्थियों की खपत चार से पांच सिलेंडर के बीच ही रहती है, इसलिए बहुत बड़ी संख्या में परिवारों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सरकार भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग की स्थिति को देखते हुए इस नीति की समीक्षा कर सकती है। फिलहाल सरकार का ध्यान सब्सिडी खर्च को संतुलित रखते हुए गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने पर है।
निष्कर्ष
उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या को 9 से घटाकर 4 करना सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। यह कदम बढ़ती गैस कीमतों और सब्सिडी बोझ को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हालांकि सब्सिडी जारी रहेगी, लेकिन अब लाभार्थियों को सीमित संख्या में ही इसका फायदा मिलेगा। आने वाले महीनों में इस फैसले का वास्तविक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
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