झारखंड में प्रशासन की सख्त कार्रवाई, जेल में बंद महापौर प्रत्याशी की इमारत पर चला बुलडोजर
बोकारो, झारखंड | 11 फ़रवरी 2026
झारखंड में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को बोकारो जिले में प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर जेल में बंद एक महापौर प्रत्याशी की अवैध इमारत को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
अवैध जमीन पर बना था भवन
प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सेक्टर-6 थाना क्षेत्र में स्थित एक अवैध ढांचे को गिराया। बताया जा रहा है कि यह निर्माण बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) की जमीन पर बिना अनुमति के किया गया था।
यह इमारत बिनोद कुमार उर्फ बिनोद खोपड़ी द्वारा बनवाई गई थी। फिलहाल बिनोद एक हत्या मामले में मुख्य आरोपी है और न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
चुनाव कार्यालय के रूप में हो रहा था इस्तेमाल
जानकारी के अनुसार, इस भवन का इस्तेमाल बिनोद के परिजन आवास और चुनावी कार्यालय दोनों के रूप में कर रहे थे। बिनोद चास नगर निगम के महापौर पद का उम्मीदवार भी था और आगामी चुनाव में भाग लेने की तैयारी कर रहा था।
प्रशासन ने दी थी पहले चेतावनी
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। अवैध निर्माण हटाने के लिए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था और भवन खाली करने के लिए एक सप्ताह का समय भी दिया गया था।
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब निर्माण नहीं हटाया गया, तब भारी पुलिस बल और बीएसएल अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर इमारत को गिरा दिया गया।
समर्थकों ने जताया विरोध
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में बिनोद के समर्थक मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया।
समर्थकों का कहना है कि यह अभियान जानबूझकर उनके उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से बाहर करने के उद्देश्य से चलाया गया है। उन्होंने प्रशासन पर प्रतिद्वंद्वियों के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया।
चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल
बिनोद खोपड़ी 27 फरवरी 2026 को होने वाले चास नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए मैदान में थे। झारखंड में नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते हैं, जहां प्रत्याशी किसी पार्टी के चुनाव चिह्न के बिना चुनाव लड़ते हैं।
इस घटना के बाद चुनावी माहौल और अधिक गर्मा गया है।
निष्कर्ष
इस कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि झारखंड प्रशासन अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों में अब सख्ती बरत रहा है। चाहे मामला किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा हो या राजनीतिक पृष्ठभूमि से, कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, समर्थकों द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों के चलते यह मामला आने वाले दिनों में और भी विवादों में घिर सकता है।
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