महाशिवरात्रि 2026 कब है? 15 या 16 फरवरी – जानिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व

By | Edited By: Fast Khabar 24
Updated: Wed, 04 Feb 2026 10:43 AM (IST)
जानिए महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व
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महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह भगवान शिव की आराधना को समर्पित है और हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर लोगों के मन में असमंजस बना हुआ है कि यह 15 फरवरी को मनाई जाएगी या 16 फरवरी को। आइए विस्तार से सही जानकारी जानते हैं।

महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2026, रविवार को शाम 5:04 बजे होगी और इसका समापन 16 फरवरी 2026, सोमवार को शाम 5:34 बजे होगा।

चूंकि चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात्रि में व्याप्त है, इसलिए महाशिवरात्रि 2026 का पर्व 15 फरवरी (रविवार) को मनाया जाएगा।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार पहर में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है।

  • निशिथ काल पूजा: रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी)
  • प्रथम प्रहर: शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक (15 फरवरी)
  • द्वितीय प्रहर: रात 9:23 बजे से 12:34 बजे तक
  • तृतीय प्रहर: रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक (16 फरवरी)
  • चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:46 बजे से 6:59 बजे तक

महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था। इसी दिन शिव और माता पार्वती का पावन विवाह भी संपन्न हुआ था। शिव पुराण में बताया गया है कि इस रात्रि भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, जिनका न आदि है न अंत।

यह रात ध्यान, साधना और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन व्रत रखकर श्रद्धा से शिव पूजा करता है, उसे जीवन के कष्टों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

महाशिवरात्रि पर क्या करें

  • दिनभर उपवास रखें
  • रात्रि जागरण कर शिवलिंग का अभिषेक करें
  • बेलपत्र, दूध, जल, शहद और भस्म अर्पित करें
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें

डिस्क्लेमर

यह जानकारी पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल सामान्य सूचना देना है। किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले योग्य विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।

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