- अंबिकापुर में धान खरीदी को लेकर मचा बवाल
- 51 से घटाकर 37 क्विंटल करने पर अड़े रहे अफसर
- भारी विरोध के बाद 48 क्विंटल पर बनी सहमति
अंबिकापुर में धान खरीदी को लेकर हंगामा, किसानों के दबाव में प्रशासन को बदलना पड़ा फैसला
अंबिकापुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के आखिरी चरण में बलरामपुर जिले के किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डिंडो सहकारी समिति में अचानक प्रति हेक्टेयर धान खरीदी की सीमा 51 क्विंटल से घटाकर 37 क्विंटल कर दिए जाने से किसानों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई।
फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में किसान समिति परिसर में ही धरने पर बैठ गए। किसानों के साथ जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि संतोष यादव भी मौके पर मौजूद रहे। स्थिति को संभालने के लिए पहुंचे राजस्व विभाग के अधिकारी कोई स्पष्ट समाधान नहीं दे सके, जिससे किसानों का गुस्सा और बढ़ गया।

Image Source: naidunia
कलेक्टर से मोबाइल पर हुई बात
धरने के दौरान संतोष यादव ने कलेक्टर राजेंद्र कटारा से फोन पर चर्चा की और किसानों का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि जब पूरे सीजन में प्रति हेक्टेयर 51 क्विंटल धान की खरीदी की जाती रही है, तो अंतिम दिनों में इसमें कटौती करना किसानों के साथ अन्याय है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि किसी किसान ने धान के स्थान पर दूसरी फसल बोई थी, तो उसकी जानकारी गिरदावरी और भौतिक सत्यापन के दौरान ही सामने आ जानी चाहिए थी।
प्रशासन की दलील और किसानों की आपत्ति
प्रशासन की ओर से यह दलील दी गई कि कुछ किसानों द्वारा अन्य फसलें लेने के कारण खरीदी सीमा 37 क्विंटल तय की गई है, जो केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप है। इस पर किसानों ने कड़ा विरोध जताया और फैसले को अव्यवहारिक बताया।
आखिरकार 48 क्विंटल पर बनी सहमति
लंबी बातचीत और किसानों के दबाव के बाद प्रशासन को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ा। अंततः यह तय हुआ कि अब प्रति हेक्टेयर 48 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। इस निर्णय से किसानों को आंशिक राहत जरूर मिली, लेकिन असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
हजारों किसान धान बेचने से रह सकते हैं वंचित
सरगुजा जिले में अब तक लगभग 30 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। पंजीकृत किसानों में से बड़ी संख्या ने धान बेच लिया है, लेकिन खरीदी के केवल दो दिन शेष रहने के कारण करीब 10 हजार किसान धान बेचने से वंचित रह सकते हैं।
बलरामपुर जिले की स्थिति
बलरामपुर जिले में पंजीकृत किसानों में से करीब 75 प्रतिशत किसान ही अब तक धान बेच पाए हैं। हजारों किसानों के टोकन जारी होने की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है, जिससे समय पर खरीदी को लेकर चिंता बनी हुई है।
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