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गुजरात में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान युवक की मौत, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

गुजरात के भरूच जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। पुलिस भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान 25 वर्षीय एक युवक की दौड़ लगाते समय मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे देश में चल रही पुलिस और सैन्य भर्ती प्रक्रियाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, भरूच जिले में गुजरात पुलिस भर्ती के अंतर्गत शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें उम्मीदवारों को तय समय सीमा के भीतर 5 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी। मृतक युवक ने यह दौड़ 25 मिनट की निर्धारित सीमा के बजाय मात्र 21 मिनट में पूरी कर ली थी, जो उसकी अच्छी शारीरिक क्षमता को दर्शाता है।

दौड़ पूरी करने के कुछ ही समय बाद युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक को सांस लेने में दिक्कत हुई और वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत उसे संभालने की कोशिश की और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

हादसे के बाद जब युवक का पोस्टमार्टम कराया गया, तो रिपोर्ट में सामने आया कि युवक के दिल में ब्लड क्लॉट (थक्का) था। यही उसकी मौत का मुख्य कारण बताया गया। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के दौरान अगर शरीर में पहले से कोई अंदरूनी समस्या हो, तो अचानक हार्ट फेलियर या क्लॉट बनने की आशंका बढ़ जाती है।

हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या युवक को भर्ती प्रक्रिया से पहले किसी प्रकार की विस्तृत मेडिकल जांच से गुजरना पड़ा था या नहीं।

भर्ती प्रक्रिया पर उठते सवाल

इस घटना ने पुलिस भर्ती की मौजूदा व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—

  • क्या भर्ती से पहले उम्मीदवारों की डिटेल्ड हार्ट और ब्लड प्रोफाइल जांच की जाती है?
  • क्या मेडिकल स्क्रीनिंग सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?
  • क्या दौड़ के दौरान पर्याप्त एम्बुलेंस, डॉक्टर और इमरजेंसी सुविधाएं मौजूद थीं?
  • क्या अत्यधिक गर्मी, धूल और तनावपूर्ण माहौल को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कराई गई थी?

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में युवाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में भी देखने को मिल रही हैं। ऐसे में केवल बाहरी फिटनेस देखकर किसी को शारीरिक परीक्षा में उतार देना खतरनाक हो सकता है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक युवक के परिवार के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं है। परिजनों के अनुसार, युवक पूरी तरह स्वस्थ था और पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देख रहा था। उसने महीनों तक कड़ी मेहनत की, रोजाना दौड़ लगाई और खुद को शारीरिक रूप से तैयार किया।

परिवार का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में बेहतर मेडिकल जांच होती, तो शायद इस जानलेवा हादसे को टाला जा सकता था। परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

पुलिस विभाग ने यह भी कहा है कि भर्ती प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार कराई जा रही थी, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाएगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह कोई पहला मामला नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहले भी ऐसी खबरें सामने आ चुकी हैं, जहां—

  • पुलिस भर्ती
  • सेना भर्ती
  • अग्निवीर चयन
  • होमगार्ड या फिजिकल टेस्ट

के दौरान युवा उम्मीदवारों की मौत हो चुकी है। हर बार सवाल वही उठते हैं, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • हार्ट क्लॉट, साइलेंट हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट आजकल युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • अत्यधिक दौड़, तनाव, डिहाइड्रेशन और गर्म मौसम में जोखिम और बढ़ जाता है।
  • भर्ती परीक्षाओं से पहले ECG, ब्लड प्रेशर, ब्लड थिनिंग और हार्ट हिस्ट्री जैसी जांच अनिवार्य होनी चाहिए।

आगे क्या ज़रूरी है?

इस दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

  1. भर्ती से पहले उम्मीदवारों की कम्पलीट मेडिकल जांच अनिवार्य की जाए
  2. दौड़ स्थल पर आईसीयू एम्बुलेंस और कार्डियोलॉजिस्ट मौजूद हों
  3. अत्यधिक गर्मी में परीक्षाएं न कराई जाएं
  4. मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट को सिर्फ कागज़ी औपचारिकता न बनाया जाए

निष्कर्ष

भरूच की यह घटना सिर्फ एक युवक की मौत नहीं है, बल्कि सिस्टम की एक बड़ी चूक को उजागर करती है। जो युवा देश की सेवा करने का सपना लेकर मैदान में उतरते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सिस्टम की ही होती है।

अगर समय रहते भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मौत से सबक लेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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