बोकारो स्टील प्लांट में मजदूरों और विस्थापितों के शोषण को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर
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बोकारो।
बोकारो स्टील प्लांट में वर्षों से मजदूरों और विस्थापितों के शोषण का सिलसिला लगातार जारी है। ठेकेदारों द्वारा मजदूरों से जबरन वसूली और वेतन में कटौती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत ठेका मजदूरों के वेतन से ठेकेदार 25 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक की अवैध कटौती करते हैं। मजदूरों का कहना है कि बैंक खाते में वेतन आते ही उनसे 4 से 5 हजार रुपये तक वापस मांगे जाते हैं। यदि कोई मजदूर पैसे देने से मना करता है, तो उसे काम से निकाल दिया जाता है।

मास्टर प्लान अब तक नहीं हुआ सार्वजनिक

जानकारी के अनुसार, बोकारो स्टील प्लांट के ठेकेदारों का मास्टर प्लान आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी का फायदा उठाकर मजदूरों का शोषण खुलेआम किया जा रहा है। गरीब मजदूर और विस्थापित परिवार मजबूरी में यह सब सहने को विवश हैं।

सरकार और प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सेल (SAIL) प्रबंधन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। मजदूरों का आरोप है कि सभी जिम्मेदार संस्थाएं इस मुद्दे पर आंखें मूंदे बैठी हैं।

मजदूरों का कहना है कि सरकारें केवल राजनीतिक फायदे के लिए सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों से जांच कराती हैं, लेकिन मजदूरों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देतीं।

नेताओं और अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

बीएसएल के मजदूरों का आरोप है कि इस शोषण के पीछे प्लांट के कुछ अधिकारी, ठेकेदार और स्थानीय नेता शामिल हैं। आपसी मिलीभगत के कारण यह पूरा सिस्टम एक “बिजनेस मॉडल” की तरह चल रहा है, जिसमें गरीब मजदूरों की मेहनत का शोषण किया जा रहा है।

मजदूरों में आक्रोश

लगातार हो रहे अन्याय से मजदूरों में भारी आक्रोश है। कई मजदूरों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और मजदूर संघों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे ठेका सिस्टम की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

न्याय का इंतजार

फिलहाल, बोकारो स्टील प्लांट के मजदूर न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यह देखना होगा कि सरकार और प्रबंधन कब तक इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाते हैं और कब तक मजदूरों को उनका हक मिलता है।

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Sushil Kumar

एक डिजिटल न्यूज़ लेखक और Fastkhabar24.in के एडिटर हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, सरकारी अपडेट, भर्ती, ऑटो और टेक से जुड़ी अहम खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक प्रमाणिक और अपडेटेड जानकारी पहुंचाना है।

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