₹2000 से ऊपर UPI पेमेंट पर नया नियम लागू न्यूज़ ग्राफिक
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2000 रुपये से ज्यादा UPI पेमेंट पर नया अपडेट, जानिए क्या बदला?

अगर आप रोज़ाना UPI से पेमेंट करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ ट्रांजैक्शन पर नया नियम लागू हो गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है… क्योंकि इसका सीधा असर आपकी जेब पर नहीं पड़ेगा! 😌👇

क्या है नया नियम?

NPCI ने साफ किया है कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी यदि आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित को UPI से पैसे भेजते हैं, तो आपसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

बदलाव केवल वॉलेट के जरिए किए गए मर्चेंट भुगतान (P2M) पर लागू होगा। यदि ग्राहक 2000 रुपये से ज्यादा राशि वॉलेट के माध्यम से किसी मर्चेंट को ट्रांसफर करता है, तो उस ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 1.1% तक का चार्ज मर्चेंट को देना होगा।

ध्यान रहे — यह शुल्क बैंक-टू-बैंक सीधे UPI ट्रांसफर पर लागू नहीं होगा। यह नियम केवल वॉलेट मोड से किए गए भुगतान पर लागू है।

ट्रांजैक्शन लिमिट में क्या है स्थिति?

  • सामान्य UPI लेनदेन की दैनिक सीमा 1 लाख रुपये बनी रहेगी।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और IPO जैसी श्रेणियों में दैनिक सीमा 5 लाख रुपये तक हो सकती है।
  • कुछ विशेष मर्चेंट कैटेगरी में 10 लाख रुपये तक की सीमा की अनुमति है।
  • कई बैंक प्रतिदिन लगभग 20 UPI ट्रांजैक्शन की सीमा बनाए रखते हैं।

यहां भी स्पष्ट है कि 1.1% शुल्क केवल वॉलेट आधारित मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा, सीधे बैंक खाते से किए गए भुगतान पर नहीं।

ग्राहकों और व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा?

ग्राहकों के लिए राहत की बात है कि छोटे और व्यक्तिगत ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। यदि आप 5000 रुपये का भुगतान वॉलेट से करते हैं, तो उसका शुल्क मर्चेंट वहन करेगा, आपसे नहीं लिया जाएगा।

दूसरी ओर, व्यापारियों को अपने पेमेंट सिस्टम और लागत प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। बड़े व्यवसायों को बढ़ी हुई ट्रांजैक्शन लिमिट का फायदा मिलेगा, जिससे वे अधिक राशि आसानी से स्वीकार कर सकेंगे।

यह कदम डिजिटल लेनदेन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

इस बदलाव का मकसद क्या है?

NPCI का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। बड़े वॉलेट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने से प्रोसेसिंग लागत को संतुलित किया जा सकेगा और सिस्टम की निगरानी बेहतर होगी।

साथ ही, छोटे उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती रहेगी। यह कदम कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित बैंक या आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

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Sushil Kumar

एक डिजिटल न्यूज़ लेखक और Fastkhabar24.in के एडिटर हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, सरकारी अपडेट, भर्ती, ऑटो और टेक से जुड़ी अहम खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक प्रमाणिक और अपडेटेड जानकारी पहुंचाना है।

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