झारखंड में करोड़ों की योजनाएं ठप, एक पैसा भी खर्च नहीं

Published: Sun, 12 Apr 2026 08:49 AM (IST)
झारखंड मंत्रालय भवन जहां करोड़ों की योजनाएं फाइलों में अटकी रहीं और किसानों तक लाभ नहीं पहुंचा
खबर शेयर करें:

रांची: झारखंड में किसानों और ग्रामीण विकास के लिए बनाई गई कई अहम योजनाएं वित्तीय वर्ष 2025-26 में जमीन पर उतर ही नहीं सकीं। कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग की करीब डेढ़ दर्जन योजनाएं फाइलों में ही अटकी रह गईं, जबकि इन पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान था।

योजनाएं बनीं, लेकिन लागू नहीं हो सकीं

राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं तैयार की थीं। इनमें एग्री एक्सपोर्ट, पशुओं की नस्ल सुधार, और कृषि विकास से जुड़ी योजनाएं शामिल थीं।

लेकिन बजट आवंटन के बावजूद कई योजनाओं को क्रियान्वित ही नहीं किया गया, जिससे उनका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाया।

झारखंड कृषि योजना

करोड़ों का बजट, लेकिन खर्च शून्य

कई योजनाएं ऐसी रहीं जिनके लिए करोड़ों रुपये तय किए गए, लेकिन एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ।

  • पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर योजना: ₹7 करोड़ (खर्च 0)
  • बीज और रोपण सामग्री योजना: ₹12.05 करोड़ (खर्च 0)
  • परंपरागत कृषि विकास योजना: ₹17.35 करोड़ (खर्च 0)

यह स्थिति बताती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमी रही।

कृषि बजट रिपोर्ट

कागजों में ही सीमित रह गईं योजनाएं

कई बड़ी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं।

  • राष्ट्रीय बांस मिशन
  • कृषि मशीनीकरण योजना
  • फार्मर्स चैंबर और अन्य परियोजनाएं
  • पोल्ट्री और डेयरी से जुड़ी योजनाएं

इन सभी के लिए बजट तय था, लेकिन कोई वास्तविक खर्च नहीं हुआ।

दूध और अंडा उत्पादन की योजनाएं भी ठप

पशुपालन से जुड़ी योजनाएं भी लागू नहीं हो सकीं, जिनका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता था।

  • मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना
  • अंडा उत्पादन प्रोत्साहन योजना
  • दूध उत्पादकों के लिए प्रोत्साहन योजना

इन सभी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे, लेकिन वे शुरू ही नहीं हो सकीं।

पशुपालन योजना झारखंड

कई मोर्चों पर सरकार को झटका

जनकल्याण से जुड़ी कई योजनाएं भी प्रभावित हुईं।

  • गो मुक्ति धाम योजना शुरू नहीं हो सकी
  • पोल्ट्री और लैब सुविधाओं के लिए फंड जारी नहीं हुआ
  • चैंबर ऑफ फार्मर्स का गठन नहीं हो पाया
  • एग्री एक्सपोर्ट योजना भी अधूरी रह गई

विभागों का खर्च: असमान तस्वीर

हालांकि कुछ विभागों ने बेहतर प्रदर्शन किया:

  • सहकारिता विभाग: 96.5% खर्च
  • डेयरी विभाग: 95%
  • फिशरी विभाग: 89%
  • कृषि विभाग: 70%
  • भूमि संरक्षण: 65%

फिर भी कई अहम योजनाओं का जमीन पर न उतरना सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े करता है।

क्या है बड़ा सवाल?

इतनी बड़ी राशि तय होने के बावजूद योजनाओं का लागू न होना प्रशासनिक लापरवाही या योजना प्रबंधन की कमी की ओर इशारा करता है। इसका सीधा असर किसानों और ग्रामीण विकास पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

झारखंड में योजनाओं की घोषणा और बजट आवंटन के बावजूद उनका क्रियान्वयन कमजोर रहा। अब सवाल यह है कि भविष्य में ऐसी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

👉 ऐसी ही ताज़ा और खास खबरों के लिए हमें Facebook पर Follow करें

Follow Us on Facebook
खबर शेयर करें:
Sushil Kumar

एक डिजिटल न्यूज़ लेखक और Fastkhabar24.in के एडिटर हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, सरकारी अपडेट, भर्ती, ऑटो और टेक से जुड़ी अहम खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक प्रमाणिक और अपडेटेड जानकारी पहुंचाना है।

Leave a Reply